आई हु इस जहाँ मे उम्मीदों के सहारे
खुशियाँ न दे सकूँ गर
उम्मीदों के सहारे
पल भर की ये ज़िन्दगी
है करना है क्या हमें
बस हस्ते हुए काट
लेना है उम्मीदों के सहारे
वो जो आकाये हर
ज़माना है भेजा जिसने हमें
क्या करना है हमे
बताया है उम्मीदों के सहारे
शाहिन्दा तू भी एक दिन बुलंदियों को छुएगी
हाँ सुन तेरी नैय्या
पार लगेगी उम्मीदों के सहारे

Nice line
ReplyDeletenice writing
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