भारत मे बैंकिंग प्रणाली का संक्षिप्त इतिहास
विश्व मे आधुनिक बैंकिंग प्रणाली की शरुआत ‘BANK OF NEITHERLAND’ के द्वारा 1609 मे की गयी | इसके पश्चात लन्दन मे ‘BANK OF ENGLAND’ की स्थापना की गयी जिसे “MOTHER OF ALL COMMERCIAL BANK” कहा जाता है |
भारत मे प्रथम बैंक ‘BANK OF HINDUSTAN’ था जिसे 1770 में ‘ALEXENDER & COMPANY’ के द्वारा स्थापित किया गया था | इसके पश्चात ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1806 मे ‘कलकत्ता प्रेसीडेंसी बैंक’ और 1843 मे ‘मद्रास प्रेसीडेंसी बैंक’ की स्थापना की गयी | इसके बाद 1881 मे पहली बार भारतीयों के द्वारा ‘AWADH COMMERCIAL BANK’ की स्थापना की गयी किन्तु इसकी देयता अत्यंत सीमित थी | इसके पश्चात 1893 मे पूर्ण रूप से भारतीय बैंक ‘PUNJAB NATIONAL BANK’ की स्थापना की गयी |
सन 1913 मे ब्रिटेन के महान अर्थशास्त्री जॉन कीन्स की प्रसिद्ध पुस्तक ‘INDIAN CURRENCY AND FINANCE’ मे भारतीय मौद्रिक प्रणाली के एकीकरण की सलाह दी गयी थी | इसके आधार पर 1921 मे तीनो प्रेसीडेंसी बैंको को मिलाकर ‘इम्पीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया’ की शरुआत हुई तथा ये बैंक वाणिज्यिक बैंक के साथ-साथ केन्द्रीय बैंक का भी कार्य करता था |
1914 के चेम्बेरलिन आयोग, 1925 के हिल्टन यंग
आयोग और 1931 की केन्द्रीय बैंकिंग जांच समिति की सिफ़ारिशो के आधार पर 1934 मे
आर.बी.आई. अधिनियम पारित किया गया तथा 1 अप्रैल 1935 को आर.बी.आई. की स्थापना कर
दी गयी |
आर.बी.आई. का संगठन
प्रथम गवर्नर → सर ऑसबर्न स्मिथ
प्रथम
भारतीय गवर्नर → सी.डी.देशमुख
वर्तमान
गवर्नर → डॉ. रघुराम राजन
केन्द्रीय विभाग (मुंबई)
→ एक गवर्नर, 4 डीप्टी गवर्नर(5 वर्ष)
→ वित् मंत्रालय द्वारा नियुक्त सरकारी अधिकारी |
स्थानीय विभाग
→दिल्ली
→मुंबई
→कोल्कता
→चेन्नई
क्षेत्रीय विभाग
→ 22 राज्यों की राजधानियों मे |


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