Wednesday, 27 April 2016

आइये जाने भारत की बैंकिंग प्रणाली की शरुआत कैसे हुई



भारत मे बैंकिंग प्रणाली का संक्षिप्त इतिहास

     विश्व मे आधुनिक बैंकिंग प्रणाली की शरुआत ‘BANK OF NEITHERLAND’ के द्वारा 1609 मे की गयी | इसके पश्चात लन्दन मे ‘BANK OF ENGLAND  की स्थापना की गयी जिसे “MOTHER OF ALL COMMERCIAL BANK”  कहा जाता है |
               
   भारत मे प्रथम बैंक ‘BANK OF HINDUSTAN’ था जिसे 1770 में ALEXENDER & COMPANY’ के द्वारा स्थापित किया गया था | इसके पश्चात ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1806 मे ‘कलकत्ता प्रेसीडेंसी बैंक’ और 1843 मे ‘मद्रास प्रेसीडेंसी बैंक’ की स्थापना की गयी | इसके बाद 1881 मे पहली बार भारतीयों के द्वारा ‘AWADH COMMERCIAL BANK’ की स्थापना की गयी किन्तु इसकी देयता अत्यंत सीमित थी | इसके पश्चात 1893 मे पूर्ण रूप से भारतीय बैंक ‘PUNJAB NATIONAL BANK  की स्थापना की गयी |
                   
    सन 1913 मे ब्रिटेन के महान अर्थशास्त्री जॉन कीन्स की प्रसिद्ध पुस्तक ‘INDIAN CURRENCY AND FINANCE’ मे भारतीय मौद्रिक प्रणाली के एकीकरण की सलाह दी गयी थी | इसके आधार पर 1921 मे तीनो प्रेसीडेंसी बैंको को मिलाकर ‘इम्पीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया’ की शरुआत हुई तथा ये बैंक वाणिज्यिक बैंक के साथ-साथ केन्द्रीय बैंक का भी कार्य करता था |

        1914 के चेम्बेरलिन आयोग, 1925 के हिल्टन यंग आयोग और 1931 की केन्द्रीय बैंकिंग जांच समिति की सिफ़ारिशो के आधार पर 1934 मे आर.बी.आई. अधिनियम पारित किया गया तथा 1 अप्रैल 1935 को आर.बी.आई. की स्थापना कर दी गयी |




आर.बी.आई. का संगठन    

प्रथम गवर्नर सर ऑसबर्न स्मिथ  
प्रथम भारतीय गवर्नर सी.डी.देशमुख  
वर्तमान गवर्नर डॉ. रघुराम राजन  

केन्द्रीय विभाग (मुंबई)

एक गवर्नर, 4 डीप्टी गवर्नर(5 वर्ष)
वित् मंत्रालय द्वारा नियुक्त सरकारी अधिकारी |

स्थानीय विभाग

दिल्ली
मुंबई
कोल्कता
चेन्नई

क्षेत्रीय विभाग

22 राज्यों की राजधानियों मे | 

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