Thursday, 21 April 2016

"माँ मुझे मौका तो दिया होता थैंक्यू कहने का".......




"माँ मुझे मौका तो दिया होता थैंक्यू कहने का".......

कल का दिन एक दम सामान्य था। वही सुबह उठना रोज़ के काम जल्दी जल्दी निपटाने की आपा धापी और इस जल्दी का कारण यूनिवर्सिटी जाने की फ़िक्र है और जल्दी इस बात की पहली क्लास जो की मुकुल सर की होती है उसमे देर न हो जाये क्योंकि जितनी जिज्ञासा और कौतुहल तथा उत्साह इस क्लास में जाने का रहता है शायद दूसरी क्लासों में नही, और आज की क्लास में क्राइम रिपोर्टिंग के बारे में चर्चा हुई। क्लास खत्म होने के बाद सर ने दैनिक जागरण से सम्बंधित एक प्रोग्राम की जानकारी दी उसी सिलसिले में मै उनसे बातचीत करने तथा अपने कुछ प्रश्नो के उत्तर जानने के लिए सर से व्यक्तिगत तौर पर बात करने के लिए सर के केबिन में गयी, वहॉ कई प्रकार की बातें हुई पर मुकुल सर के मुख से निकला एक वाक्य कि " आखिरी बार अपनी माँ को थैंक्यू कब कहा था ये याद है क्या?"

         
                     और ये सर का एक कथन मेरे मन में फाँस की तरह गढ़ सा गया किसी तरह दिन तो कट गया पर रात में जब तकिया पर सर रखा तो ज़रूर पर आँखों से नींद कोसो दूर थी या आज शायद मेरी और नींद की कट्टी हो गयी। मेरे ज़हेन से बात जा नही रही थी मै बार बार करवट बदलती सर झटकती और इस बात को भूलने की कोशिश करती पर इस कथन ने पुरानी , भूली-बिसरी यादों तथा जज़्बातों को झंकझोर के रख दिया और मैं अपने आप ही मन में चल रही आँधी और भावनाओ से ओत प्रोत  को बवण्डर को शांत करने में लग गयी कि काश माँ एक बार मुझे शुक्रिया कहने का मौका तो दिया होता;
अभी तो मैंने माँ शब्द के मायने भी नही जाने थे

आपने तो मेरा साथ तब छोड़ दिया जब शायद मेरी ज़ुबान की तुतलाहट भी दूर नही हुई थी
मेरा भी मन करता है जब मैं खुश होउ तो माँ तुझसे लिपटु तुझको प्यार करूँ
जब मैं दुखी होऊ तो तेरी ममता का आँचल मिले जिसकी छांव में मैं सारे दुखो को भूल जाऊ
जब मै कुछ गलत करुँ तो मुझे डांटने के लिए मेरी माँ तू मेरे पास रहे
जब मैं कुछ अच्छा करुँ तो मुझे सराहने के लिए मेरी माँ तू मेरे पास रहे।
कभी ये भी ख्याल आता है की किस बात का शुक्रिया अदा करुँ उसका जो खाली पन आपके न होने से मेरी ज़िन्दगी में है या उसका जब किसी माँ को अपने बच्चे को दुलार करते देखती हूँ तो कोने में जा के रो लेती हूँ क्योकि ये दुलार मेरे नसीब में नहीँ।
फिर भी हर चीज़ के लिए थैंक्यू कि इतने कम समय के लिए ही सही पर साथ देने के लिए थैंक्यू
इस खूबसूरत दुनिया में लाने के लिए थैंक्यू
एक गुड़िया पाने की ख़ुशी में मेरी किलकारी पर तेरा बलिहारी जाने के लिए थैंक्यू
इतनी तकलीफो के बावजूद अपनी गोद में लिटाने के लिए थैंक्यू
आत्म विश्वास बढ़ाने के लिए थैंक्यू
5 साल की बच्ची की हर ज़िद पूरी करने के लिए थैंक्यू

       और कुछ शिकवे गिले और थैंक्यू कहने के चक्कर में पूरी रात गुज़र गयी और मेरी पूरी रात की कहानी मेरी तकिया के नम कोने बयान कर रहे थे।


      इसके बाद मैं अपने सभी मित्रो से दरख्वास्त करूंगी की अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड से जितना थैंक्यू या लव यू बोलते हो उससे कई गुना ज़्यादा थैंक्यू, लव यू अपने माता पिता से बोलो ताकि उन्हें भी तुम पर गर्व हो ताकि मेरी तरह आप के मन में ये कसक न रह जाये कि "मुझे मौका तो दिया होता थैंक्यू कहने का"।

2 comments:

  1. आखों को नम करदेने वाली और दिल को कुरेद देने वाली ममता की कहानी।

    शुक्रिया ऐ माँ मेरी.... हूँ मैं तेरा नूरे नज़र।

    बस यही कहना है रब से तेरा साथ रख्खे हर जन्म।

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  2. एक रिश्ता बना जो रब की अमानत है
    धूप और छाँव में बस उसकी ही चाहत है
    कौन कहता है की दुनिया में अब माँ बाप नहीं होते ,
    पास नहीं हैं तो क्या हुआ हमारी रूह का हर कतरा बस उनकी ही नियामत है !!

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